कार्यक्र्म निदेशक का परिचय

डॉ.बी. सुब्बाराव, इस केंद्र के कार्यक्रम निदेशक

इन्होंने प्रतिष्ठा के साथ प्रथम श्रेणी में स्नातक, निष्णात में विश्वविद्याल में शीर्षस्थ स्थान प्राप्त कर उस्मानिया विश्वविद्याल, भारत से क्रमशः 1986, 1988 में और क्यून्स यूनिवर्सिटी ऑफ बेलफास्ट,(क्यू यू बी) बेलफास्ट, यू.के. से 2004 में सूक्ष्मतरंग अभियांत्रिकी में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। .

आप वैज्ञानिक/अभियंता के रूप में वर्ष 1987 से 1990 तक अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) में थे। सिंथेटिक अपरेचर राडार (एसएआर) के लिए स्पंद संपीड़न यंत्र का अभिकल्प् बनाया तथा तैयार किया और अंतरिक्षयान प्रणाली का ईएमआई/ईएमसी विश्लेषण किया।

एक वैज्ञानिक/अभियंता के रूप में वर्ष 1987 से 1990 तक अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र ( भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) में थे। वहाँ पर सिंथेटिक अपरेचर राडार (एसएआर) के लिए स्पंद संपीड़न प्रणाली का अभिकल्प बनाया एवं तैयार किया और अंतरिक्षयान प्रणाली का ईएमआई/ईएमसी विश्लेषण किया।

इसके पश्चात समीर- विद्युत-चुम्बकीय विज्ञान केंद्र,चेन्नै,भारत में कार्यग्रहण किया। विगत 26 वर्षों के दौरान परिणाम अभिमुखी अनुसंधान एवं विकास और ऐन्टेना / ईएमसी अभिकल्प परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए ईएमसी प्रभाग की अध्यक्षता की। देश में पहली बार वर्ष 1992 में 10m ऑपेन एरिया टेस्ट साइट की अभिकल्पना की और इसे संस्थापित की और इसे फेडरल कम्यूनिकेशन कमिशन एफसीसी अमेरिका से सुचीबद्ध करा लिया। बाद में सीई मार्किंग करने की आवश्यकताओॆ को पूरा करने के लिए इस सुविधा में सुधार किया गया। इससे विकसित गुणवत्तापूर्ण निर्यात/आंतरिक खपत में इलेक्ट्रॉनिकी उद्योगों को सहायता मिली। मौजूदा सुविधाओं में सुधार करते हुए अन्तरराष्ट्रीय ईएमसी प्रयोगशाला के समानांतर लाकर समीर, सीईएम , चेन्नै के ईएमसी प्रभाग को नई ऊचाइयाँ दी। इनके नेतृत्व में एनएबीएल प्रत्यायित ईएमसी संविरचन गतिविधियाँ पहली बार भारत में शुरु हुई। ईएमसी डिज़ाइन और मॉडलिंग के मुद्दे विभिन्न निर्णायक संस्थाओं के ध्यान में लाए जाते हैं। यह भारत के ईएमसी मानकों में योगदान करता है और प्रापण के चरण में देश में विभिन्न अग्रणी विभागों के द्वारा इसे अपनाया जाता जिससे भारत में उत्पादों की गुणवत्ता में प्रत्यक्षतः सुधार होता है। बहुत से उद्योगों ने ईएमसी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए डिज़ाइन की सहायता ली है। अन्तरराष्ट्रीय ईएमसी मानको की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 300 से अधिक उद्योग इससे लाभांवित हुए हैं। देश में टेलिकॉम/मेडिकल/ऑटोमॉटिव इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों के डिज़ाइन परामर्श दाता हैं। ईएमसी अनुप्रयोग के लिए ऐन्टेना कारक संविरचना पर व्यापक अनुसंधान किया है। भारतीय रक्षा के लिए वाइड बैंड इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्ल्यू) ऐन्टेना (ट्रैकिंग और जामिंग ऐन्टेना) का डिज़ाइन और विकास।

इनके नाम से एक यू.एस.पेटेंट है। प्रमुख आईईई/आईईई पत्रिकाओं और अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन संदर्भों में 60 से अधिक वैज्ञानिक अभिपत्र प्रकाशित किए हैं। आईईसी टीसी 77 के कार्यदल के सदस्य हैं। डॉ.सुब्बाराव आईईई यूएसए के वरिष्ठ सदस्य हैं, आईईटीई के फेलो हैं, सीईएमसीईआई,भारत के आजीवन के सदस्य हैं, इन्टरनेशनल जनरल ऑफ पॉवर इलेक्ट्रॉनिक्स के सम्पादक हैं, सोसायटी ऑफ ईएमसी इंजीनियर्स इंडिया,चेन्नै शाखा के अध्यक्ष हैं। भारत में ईएमसी का श्रेष्ठतम पुरस्कार ईएमसी इंजीनियर का वर्ष 2009 पुरस्कार नवम्बर 2010 में दिया गया । आईईईई ईएमसी मद्रास शाखा के संस्थापक सदस्य, स्पेशिफिक क्राइटेरिया इलेक्ट्रॉनिक्स,एनएबील के अध्यक्ष। कई राष्ट्रीय परियोजनाओं के ईएमसी विशेषज्ञ सदस्य। ऐन्टेना और संचरन, यंत्रीकरण तथा माप, ऐन्टेना और बेतार संचरण लेटर (एडब्ल्यूपीएल) पर प्रस्तुत आईईई कार्यवाहियों के समीक्षा अभिपत्रो के समीक्षक। आई एस ओ/आईईसी 17025 के अनुसार प्रयोगशाला ऑडिट करने हेतु एनबीएल के तकनीकी मूल्यांकन कर्ता।